प्रश्नोत्तर P8-0094 · भाग 8
यह बात मनुष्य शरीर के लिए है या औरों के लिए भी? क्या अगला शरीर भी मनुष्य का ही मिलेगा, या दूसरा शरीर मिलेगा?
मनुष्य तो शरीर है। आप ही लोगों के लिए बात की जा रही है, जानवर के लिए थोड़ी बात की जा रही है। हमारे मानव शरीर के अलावा जितने भी हैं, उनको कर्म का अधिकार नहीं है। वह भोग शरीर है। अगर आप योग कर रहे हो, अपने कल्याण के लिए काम कर रहे हो, तो अगर इस शरीर में कल्याण नहीं हो पाया तो अगला शरीर आपको मानव का ही शरीर मिलेगा। अगर अपने आत्मिक कल्याण के लिए काम कर रहे हो तो।
और अगर आप आत्मिक कल्याण के लिए काम नहीं कर रहे, बस आपने बच्चों को पैदा किया, भोग कर रहे हो, तब आपको अगला शरीर भोग शरीर मिल जाएगा। फ्री में खाओ, घूमो, क्योंकि योग नहीं किया। योग करने वाले के लिए यह शरीर है। योग का मतलब अपना आत्मिक कल्याण करना, अपने आप को सुधारना, मैं अपने घर वापस कैसे चला जाऊं। तो अगर आपने यह नहीं किया, सिर्फ भोग किया, तो आपको यह शरीर तो मिलेगा नहीं। करोगे क्या लेके? क्योंकि तुम्हें तो भोग चाहिए। तब आप अन्य शरीर में चले जाओगे, और चौरासी लाख योनियों में ऐसे भोग ही करते रहोगे।
जब तक योग है, अपना उद्धार करने के लिए आप काम कर रहे हो, तब तक अगला शरीर यही मिलेगा। और अगर आपको उद्धार नहीं करना है, यह शरीर योग और भोग दोनों का है, और उसमें सिर्फ भोग है, तो आपने क्या किया? योग नहीं किया, सिर्फ भोग किया। तो आपको अन्य शरीर भोग का ही मिलेगा, योग का नहीं मिलेगा। एकदम समझ में भी आता है। यह लॉजिक समझ में आ रहा है। ऐसा नहीं कि किसी पर भरोसा करना है, मुझ पर या किसी और पर। यह समझ में भी आता है। इसी को प्रत्यक्ष ज्ञान कहते हैं। यहां भरोसे की बात ही नहीं है। अपने भी समझ में आता है।
सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें
वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 26 अप्रैल 2026 #योगी · 2026-04-26