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प्रश्नोत्तर P8-0193 · भाग 8

सात्विक प्रवृत्ति के लक्षण क्या हैं? और हम किस प्रवृत्ति में जी रहे हैं, यह कैसे पता चले?

सात्विक प्रवृत्ति के लक्षण यह हैं कि हम जरूरतमंद की सेवा करते हैं, और किसी की भावनाओं को समझकर उसे जवाब देते हैं। यह सात्विक प्रवृत्ति के लक्षण हैं। अब जैसे उस दिन बाबा ने आपको छुआ। यह बात आपको पता है कि आपको छूना अच्छा नहीं लगता, लेकिन बाबा को यह बात पता नहीं थी। तो बाबा आए और उन्होंने आपको ऐसे छुआ। लेकिन आपको बुरा लगा। यह तामसी प्रवृत्ति के लक्षण हैं। आपको सात्विक प्रवृत्ति में रहना चाहिए था कि भाई, उनको नहीं पता था। तो पहली बार आपको बताना था कि बाबा, यह बात है, यह काम है। अब आप क्या करते, कि मुझे छूना पसंद नहीं। अगर मुझसे कोई काम पड़े तो मुझसे दूर से बोल देना। ये सात्विक प्रवृत्ति के लक्षण हैं। लेकिन आपने उनके साथ क्या बर्ताव किया? तामसी। उनको थोड़ी पता था। तो यह सात्विक प्रवृत्ति के लक्षण हैं। यह हमें बता देना है। और सात्विक प्रवृत्ति वाला हमेशा जनकल्याण में लगा रहता है। जरूरतमंद की सेवा करता है। सत्कर्म में लगा रहता है। सत्संग सुनता है। अपना कल्याण करता है, और अपना कल्याण होने के बाद दूसरों को कल्याण का मार्ग बताता है। यही सात्विक प्रवृत्ति के लक्षण हैं। और खानपान। अगर मैं कुछ खा रहा हूं और सामने वाले को तकलीफ नहीं हो रही है, तो वह सात्विक प्रवृत्ति। अगर मैं खा रहा हूं और किसी जीव को हमारे द्वारा तकलीफ हो रही है, तो वह तामसी प्रवृत्ति है। तामसी प्रवृत्ति सिर्फ दुख देती है। तामसी और राजसी दोनों प्रवृत्ति दुख देती हैं। सात्विक आनंद में हो जाता है। और सात्विक प्रवृत्ति वाला ही परमात्मा तक पहुंचता है। तामसी और राजसी वाले बस संसार में, जगत में, बड़ा बनके घूमते रहते हैं। कभी राजा, कभी रंक। इनको कुछ चाहिए होता है।

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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 26 अप्रैल 2026 #योगी · 2026-04-26