आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P1-0163 · भाग 1

गुरु जी, आपने चिंतन बताया है। उसके अलावा किसी और साधना में बेईमानी, लालच नजर आता है और मैं भ्रमित हो जाता हूं। पर सत्कर्म और ईमानदारी को मूल रखता हूं।

बस इसी को रखो और आगे बढ़ो। अपना कल्याण करो।

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