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प्रश्नोत्तर P20-0119 · भाग 20

मुझे जो भी सेवा मिले, गुरु दर न छूटे, यह भाव कम न हो और अहंकार मुझ पर काम न करे — इसके लिए क्या करूं?

बस इतना करना है — "हे परमात्मा, मैंने मांगा था और तूने मुझे सेवा का मौका दिया; इस सेवा को मैं निपुणता से, दायित्व से, कर्तव्य से, जिम्मेदारी लेकर करूंगी। तुझे बहुत धन्यवाद कि तूने मुझे उस लायक बनाया; शरीर छूटे तो सेवा में ही छूटे।" अपने संकल्प पर रुके रहना है, बहुत विपरीत परिस्थितियां आएंगी, पर सेवा नहीं छोड़नी — सत्कर्म की सेवा एक बार हाथ से गई तो फिर नहीं मिलेगी। जिसे पूरी तरह सत्कर्म का मौका मिल जाए, वह टिका रहे तो पक्का मूल तक पहुंच जाएगा।

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वीडियो: ऐसा क्या करूं, जो तेरी सेवा हो पाए ? #योगीजी_का_सत्संग · 2025-09-02