प्रश्नोत्तर P23-0050 · भाग 23
गुरु जी, एकांत में खान-पान का भी विशेष ध्यान देना पड़ता है क्या? क्या पेट भर भोजन नहीं करना चाहिए?
खानपान तो बहुत मूल है। पेट भर, जितने में शरीर चल जाए, उससे ज्यादा ना खाओ, क्योंकि एकांत में मेहनत तो कर नहीं रहे हो। जितना समय आप रह रहे हैं, बस उतना खाइए जितने में आप जी सकें। ज्यादातर ऊर्जा को तो हम भोजन पचाने में खर्च कर देते हैं। भोजन का बहुत महत्व है — भोजन आप उतना करिए जितने में आपका शरीर चल सके; अत्यधिक भोजन नहीं करना चाहिए। हो सके तो जब तक एकांत में रहो, पेट भर भोजन ना करो, नहीं तो आलस्य रहेगा। शरीर को भोजन पचाने में सबसे ज्यादा ऊर्जा खर्च होती है। कम खाने वाले व्यक्ति को आप स्वस्थ पाओगे, देख लेना; ज्यादा खाने वाले व्यक्ति अस्वस्थ रहते हैं।
सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें
वीडियो: हम एकांत को बर्दाश्त क्यों नहीं कर पाते हैं ? #live #pratyakshgyan #yogijikasatsang · 2025-03-07