आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

मृत्यु — 43 प्रश्नोत्तर

वे प्रश्नोत्तर जिनके प्रश्न या उत्तर में “मृत्यु” शब्द आता है — नए पहले।

मन353 उत्तरध्यान331 उत्तरगुरु2,248 उत्तरकर्म580 उत्तरअहंकार84 उत्तरमृत्यु43 उत्तरपरिवार239 उत्तरसेवा321 उत्तरडर138 उत्तरक्रोध46 उत्तर

P23-0126

गुरु जी, रात को मैं कहती हूं कि जाऊंगी और सुबह कहती हूं कि नहीं जाऊंगी — घर, सुविधाएं सब हैं, लेकिन होश में आती हूं तो कहती हूं कि वह भी नहीं चाहिए। यह द्वंद्व क्यों है? मेरे अंदर दृढ़ता क्यों नहीं आ रही, मैं बार-बार डगमगा क्यों जाती हूं?

P22-0048

गुरु जी, समझ के स्तर से क्या शरीर का दर्द ओवरलुक हो पाता है? जैसे आज पूरे दो घंटे सत्संग में बैठकर सुनते रहे तो दर्द की उपेक्षा हो गई। मानसिक सहन तो समझ में आता है — विचारों और इच्छाओं की उपेक्षा कर सकते हैं — पर शारीरिक सहन में समस्या है।

P22-0024

गुरु जी, जीवात्मा में ऊर्जा कहां से आती है और मृत्यु के बाद वह ऊर्जा कहां चली जाती है? आत्मज्ञान से यह आपको मालूम हुआ है, कृपया बताएं।

P20-0194

श्वास का भीतर-बाहर आना-जाना तो कुदरती है, उसमें कोई अपेक्षा नहीं — फिर मृत्यु क्यों हो जाती है?

P20-0115

क्या आपको केदारनाथ और उस भूखी रात में मौत से डर नहीं लगा?

P20-0106

गुरु जी, आपकी साधना काल में परीक्षाएं कैसी हुईं?

P20-0039

गुरु जी, क्या सभी भय की गहराई में मृत्यु का भय ही है?

P20-0032

गुरु जी, नवजात शिशु की चार दिन में मृत्यु हो जाए तो उसका कौन सा कर्म है?

P19-0018

गुरु जी, कर्मों की सजा कैसे मिलती है? क्या मृत्यु के बाद ही फैसला होता है कि कौन सी योनि मिलेगी?

P18-0143

गुरु जी, हमारे शरीर में और दुनिया में रोज करोड़ों जन्म-मृत्यु हो रहे हैं, पर हमें फिक्र सिर्फ अपने लोगों की होती है — ऐसा क्यों? अपने बेटे के लिए सब लगा देते हैं, पड़ोसी के बेटे के लिए नहीं।

P18-0036

गुरु जी, आपकी साधना का क्रम क्या था — कितने घंटे, कौन-सी साधना, कोई अनुशासन या क्रम था?

P18-0030

गुरु जी, अंतर्मन से भाव यही रहता है कि मुझे कुछ नहीं चाहिए, फिर भी परिवार और समाज के दायित्व में वे सब चीजें आकर खड़ी हो जाती हैं और अवरोध उत्पन्न करती हैं — क्या करें?

P18-0014

गुरु जी, साधना के दौरान जब खाने और दवा तक का अभाव हो गया, तब आपने क्या किया?

P17-0181

गुरु जी, घर में किसी की मृत्यु होती है तो खुद को दोषी क्यों महसूस होता है?

P17-0123

गुरु जी, "जीवित ही मर जाए, उलट आप में समाए" — क्या यह वही स्थिति होती है?

P17-0050

गुरु जी, कहा जाता है कि मन ही काल है — इस पर क्या कहेंगे?

P16-0135

हर जीव अपने प्राण क्यों बचाना चाहता है? बहुत लोग 100 वर्ष के ऊपर चले जाते हैं; एक बूढ़ी अम्मा कह रही थीं कि अब तो सिर्फ मौत का इंतजार है, बस शरीर जल्दी छूटे और दर्द ना हो — फिर भी मौत का डर है। एक चींटी को भी मारूं तो वह भी प्राणों की रक्षा करती है। आखिर यह डर किस चीज का है?

P16-0101

(साधिका ने महात्मा बुद्ध के उस भिक्षु की कहानी सुनाई जो गाली, थप्पड़, डंडे, यहां तक कि मृत्यु सहने को भी तैयार था, ताकि ज्ञान फैला सके।) अगर हम उसकी जगह होते तो मैं भी यही करती, क्योंकि मैं खुद आई हूं, किसी ने बुलाया नहीं। फिर निवेदिता अपमान से क्यों टूट गई?

P14-0141

मनुष्य की मृत्यु होने के बाद उस आत्मा का क्या होता है?

P14-0037

गुरु जी, कुटिया में केवल तप होगा तो सेवा नहीं हो पाएगी?

P14-0033

गुरु जी, क्या गर्मी-सर्दी से बचने का उपाय भी नहीं करना चाहिए?

P13-0052

शरीर की मृत्यु के बाद आत्मा कहां और कैसे रहेगी?

P12-0171

गुरुदेव, भूख-प्यास, शोक-मोह, जीवन-मृत्यु — इनसे कैसे ऊपर उठें?

P12-0142

(एक साधक) गुरु जी, इस मार्ग पर लाखों-करोड़ों चलते हैं पर पहुंचता कोई एक है — मैं वही एक होना चाहता हूं।

P12-0123

चंडीगढ़ से एक प्रोफेसर ने फोन किया कि उनके एक नजदीकी रिश्तेदार की मृत्यु के बाद कोई डिप्रेशन का शिकार है, और वो उसे योगी जी के सामने लाना चाहती हैं कि योगी जी की दृष्टि उस पर पड़ेगी तो वो शायद बाहर आ जाएगी। क्या ऐसा होता है?

P12-0090

देखने में तो ऐसा आता है कि हम 80-90% तो ईमानदार ही हैं, थोड़ा-बहुत ही हमसे गलत होता है; पर आप कहते हैं कि या तो हम पूरे ईमानदार हैं या पूरे बेईमान। "दाल में नमक जितना तो चलता है" — अगर पूरी दाल ही प्योर कर दें, तो क्या आत्म कल्याण अपने आप हो जाएगा?

P12-0070

लाश के ऊपर कफ़न डालना क्या सत्कर्म या पुण्य है? पड़ोस में किसी की मृत्यु हो जाए तो लोग उस पर कफ़न डालना अपना पुण्य समझते हैं।

P10-0159

जब आपको सब कुछ नहीं पता, तो जन्म-मृत्यु से आप मोक्ष कैसे करवा रहे हैं?

P9-0014

जिसके साथ मैं हूं, उसके अंदर मुझे संभालने का डर है। मैं उस पर इतना आश्रित हूं कि वह जीवन में कुछ नहीं कर पाता। गुलामी से मैं कैसे मुक्त होऊं?

P8-0063

आत्मज्ञान के बाद मृत्यु होने पर मोक्ष हो जाता है?

P8-0013

एक श्रोता लिखता है कि चेतना, जिसके द्वारा हम जागृत अवस्था का अनुभव करते हैं, वह भी मृत्यु के बाद चली जाती है, इसलिए वह भी अस्थायी हुई, असत्य हुई। इस प्रकार सत्य अव्यक्त हुआ। गुरु जी, इस पर क्या कहना है? और अगर आज तक जो किया वह गलत था, तो आगे रहना मुश्किल हो जाएगा?

P7-0037

आत्मा मृत्यु लोक में भगवान को पाने का प्रण लेकर आती है, पर विषयों को चुनती है। तो क्या यह धोखा ही है?

P6-0173

राधेश्याम पूछते हैं, ईमानदारी से चलने पर मृत्यु का डर कम लगेगा क्या?

P6-0153

काशी के बारे में बताइए। क्या काशी में जो मरता है उसे मोक्ष मिलता है? लोग मरने के लिए काशी जाते हैं। क्या वहाँ शंकर तारक मंत्र का उपदेश देकर मुक्त कर देते हैं?

P6-0152

प्रकृति में जो इंद्रियों द्वारा मिलता है, उसे क्या कहेंगे? क्या उसे भी रसपान कहेंगे? जो अकेले एकांत में प्रकृति से मिलता है, वह रसपान है या जरूरत? अघोरी साधना और श्मशान का क्या मतलब है?

P6-0062

जब साधक आत्मचिंतन के लिए बैठता है, तो क्या चिंतन करे, क्या मनन करे, क्या सोच-विचार करे, जिससे आत्मचिंतन हो, आगे उन्नति हो, आत्मकल्याण हो और तत्व का अनुभव हो जाए? वीडियो बीच में कट जाते हैं, इसलिए जो सोलह बातें बताई जाती हैं, उनका एक छोटा पैंफलेट या पुस्तक हो, जिसे जेब में रखकर बार-बार देख सकूं, तो ज्यादा लाभ हो। मैं झुंझुनू के पास से आया हूं। आज सोलहवां दिन है। ग्रंथों में पढ़ा है कि आत्मा है, पूर्ण है, पर वह ज्ञान अनुभव में कैसे उतरे? घर और संबंधों का चिंतन चलता रहता है। बैठकर ऐसा क्या सोचूं, क्या मनन करूं, कि मूल की ओर बढ़ूं और अनुभव हो जाए?

P6-0059

प्रणाम योगी जी। जीवन के हर अनुभव को व्यक्त किया जा सकता है। तो आत्मज्ञान के अनुभव को व्यक्त क्यों नहीं किया जा सकता? क्या इसके लिए कोई शब्द नहीं बने हैं, या शब्द वहां तक पहुंच नहीं पाते?

P6-0020

एक्ट नहीं करूं फिर भी याद/विचार आते हैं — क्या करें?

P5-0179

एकादशी पर मृत्यु हो तो मोक्ष मिलता है?

P5-0040

(लाइव/कुटिया) आत्मज्ञान के बाद प्रश्न हट गए — फिर भी कुछ पूछना रहता है? इस जन्म में हर कोई प्रयास कर सकता है?

P3-0183

(कुटिया में साधक) जैसे आप बोलते हैं कि जन्म-मृत्यु के चक्कर से निकलना है — तो अगर काम करते-करते निकल गए, तो फिर कहां जाएंगे?

P2-0057

जब हमने अपनी मर्जी से शादी की है, तो मृत्यु तक अपने परिवार को न छोड़ना हमारी जिम्मेदारी है ना?

P1-0133

गुरु जी, एक साल पहले मेरे पति की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई। मेरे दो बच्चे हैं (17 और 20 साल के)। गांव बिहार में है, मैं महाराष्ट्र में अकेले बच्चों के साथ रहती हूं और बहुत घुटन होती है।