आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P23-0074 · भाग 23

गुरु जी, जरूरत में जीने का मतलब समझ में नहीं आ रहा। हर आदमी ने तो अपनी-अपनी जरूरत बनाई हुई है — तो कैसे तय करें कि इतनी जरूरत है?

अपनी-अपनी जरूरत आप कैसे बना लोगे? भोजन, कपड़ा और मकान। एक बंदा सोचता है कि मुझे लग्जरी मकान चाहिए — यह जरूरत नहीं है, यह बेवकूफी है। अपनी बेवकूफी को जरूरत का नाम मत दो। मकान रहने के लिए बनाए — ना अच्छा ना बुरा, यह आप तय कर दिए। हमें सुरक्षित रहने के लिए मकान चाहिए — बस जितने में मैं जी सकूं, यह जरूरत है। 20–25 साल पहले AC नहीं था तो क्या लोग नहीं जीते थे? AC से रोग ज्यादा बढ़ जाता है शरीर में — स्वास्थ्य के लिए प्राकृतिक रहना ठीक है। अभी भी पंखे से काम चल जाएगा। आपने अपने आप को मशीनों के द्वारा कमजोर बना दिया — मशीनों का सहयोग लेना था स्थिति-परिस्थिति में, आप उसके आदी हो गए, गलती आपने कर दी। जरा सा सिर दर्द हुआ, तुरंत टेबलेट — अरे जरा रुको, शरीर में भी ऐसा सिस्टम है जो सही कर देता है, जरा इंतजार तो करो। सुविधा का उपयोग करो, लेकिन पतन तो मत करो। घर हमें जितने में हम रह सकें उतना चाहिए।

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वीडियो: अभेद होते हुए भी भेद क्यों लगता है ? #livesatsang #livesatsangyogijika · 2025-03-07