आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P23-0098 · भाग 23

गुरु जी, इतनी आसान बात है, फिर हम लोगों का अड़ता कहां पर है? जैसे आपने मुझे डांट दिया, तो मुझे देखना चाहिए कि डांटा किस लिए — कहीं गलती है — और उसे लाइटली लेना चाहिए; पर हम लोग किसी बात को लाइटली लेते नहीं।

इसलिए कि आप पक्का नहीं कर पा रहे हो कि चाहिए क्या। और आप उल्टा करते हो — जहां आप रसपान करते हो वहां लात-जूते खाते हो, चलेगा; और जहां रसपान से छुटकारा दिलाया जाएगा, वहां एक शब्द बर्दाश्त नहीं कर पाते। जहां सच में आपके कल्याण की बात होगी, वहां आप नहीं सह पाते; और जहां आपके रसपान की बात होगी, वहां के लात-जूते भी ठीक हैं। उसी घर में कभी हाथ में हाथ डाल के प्रेम की बातें करते हैं, और उसी घर में, उन्हीं हाथों से तोड़ाई भी हो रही है — कभी उसी व्यक्ति के गले लग रहे हैं, उसी से मारपीट हो रही है। यह कैसी जिंदगी है? पशुओं की तरह जी रहे हैं। और फिर कहते हो "प्रेम में झगड़े होते हैं, प्रेम बढ़ता है" — अपनी लड़ाई-कुटाई को प्रेम का नाम दे दिया, कितना गिर गए हम! जिसके प्रति आपका प्रेम होगा, क्या आप उस पर उंगली भी उठा सकते हो? यह प्रेम नहीं, इच्छा-अपेक्षा है — रसपान के चक्कर में लात-जूते खाके पड़े हैं। फिर भी एक-दूसरे से तुलना करके तसल्ली देते रहते हैं कि मैं उससे बेटर हूं, मैंने कम मार खाई — तुलना करके बहुत बुरी जगह हमने अपने आप को फंसा लिया।

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वीडियो: जीव , माया और ब्रह्म क्या है ? #livesatsangyogijika #aadhyatmik_satsang #yogijikasatsang · 2025-03-09