प्रश्नोत्तर P23-0111 · भाग 23
गुरु जी, हिंदू धर्म में जाति प्रथा या छुआछूत क्या सही है? यदि हां तो कैसे, और यदि नहीं तो कहां तक गलत है?
एकदम गलत है। चार वर्ण हैं — ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र। जब पृथ्वी पर कोई भी जीव अपने बच्चों को जन्म देता है, तो उसका मल हाथ या मुंह से साफ करता है — उस समय वह शूद्र होती है; फिर भोजन की व्यवस्था करती है — उस समय वैश्य; फिर समाज से रक्षा करती है — उस समय क्षत्रिय; आखिर में ज्ञान देकर छोड़ देती है — उस समय ब्राह्मण। वैसे ही जो जीवन जीने की शुरुआत करता है — ज्ञान से ब्राह्मण, अपनी रक्षा करता है तो क्षत्रिय, भोजन की व्यवस्था करता है तो वैश्य, अपने मल-मूत्र को साफ करता है तो शूद्र। चार वर्ण प्राकृतिक हैं, पूरा सिस्टमैटिक है, पृथ्वी के हर जीव में चार वर्ण हैं। चार वर्ण आप अपने लिए तो अपना रहे हो; अगर समाज के लिए अपनाने लगो — किसी को सत मार्ग बताने लगो, किसी की रक्षा करने लगो, ईमानदारी से व्यापार करने लगो, लोगों की सेवक बनकर सेवा करने लगो — तो मुक्ति से मोक्ष तक पहुंच जाओगे। चार वर्ण अपनाकर ही मोक्ष पाया जा सकता है; एक भी पकड़ लिया तो भटकते रह जाओगे। महात्मा चारों अपना लेता है — ज्ञान देता है, रक्षा कैसे करो बताता है, ईमानदारी से व्यापार कैसे करो बताता है, सेवा कैसे करो बताता है — इसलिए महात्मा कहता है मुझे जात-पात से मतलब नहीं है। इस संसार में दो चीज जहर की तरह फैल रही हैं: एक — मात-पिता अपने बच्चों को सिखा के कहते हैं "बेटा बड़ा बनना", यह विष का घूंट पीढ़ी दर पीढ़ी बड़े प्यार से पिलाया जा रहा है; दूसरी — जात-पात की व्यवस्था, यह समाज में जहर है जो हमें राग-द्वेष में रखता है। आज वर्ण के हिसाब से देखो — ब्राह्मण कौन, जिसमें ज्ञान देने की क्षमता हो; क्षत्रिय कौन, जिसमें दूसरों की रक्षा करने की क्षमता हो; वैश्य कौन, जिसमें ईमानदारी से व्यापार करने की क्षमता हो; शूद्र कौन, जिसमें सेवा-भाव की क्षमता हो — चार तो छोड़ो, एक भी जल्दी मिल जाए तो समझ लेना। बचपन से हमारे अंदर यह एक परसेंट भी नहीं था — चाहे जिसके साथ बैठ के खा लेते थे।
सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें
वीडियो: जीव , माया और ब्रह्म क्या है ? #livesatsangyogijika #aadhyatmik_satsang #yogijikasatsang · 2025-03-09