आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P23-0117 · भाग 23

गुरु जी, जैसे आंख बंद करके बैठते हैं, तो क्या इसको ध्यान नहीं बोला जा सकता? शुरुआती दौर में लोग मूर्ति का या मंत्र का सहारा लेते हैं, लेकिन एक स्थिति होती है जब किसी का सहारा नहीं लिया जाता, अपने आप में रहना होता है — उसको ध्यान बोलना ठीक नहीं रहेगा?

आंख बंद करके बैठ गया तो ध्यान हो गया? आंख खोल के बैठूं चाहे बंद करके — इसको ध्यान थोड़ी कहते हैं। ध्यान तो "चाहिए" में घट रहा है। ध्यान रखना — ध्यान में दो होते हैं: एक देखने वाला, और कोई सामने। तो "कुछ नहीं चाहिए" की स्थिति में ध्यान की आवश्यकता भी नहीं है — उसी में तो आप हो। ध्यान से मुक्त होना है; ध्यान ही आपके भटकाव का कारण है। सबसे ज्यादा अगर आप परेशान हो तो ध्यान से, एक आदत डाल दी गई है — ध्यान, ध्यान, ध्यान। किताबें पढ़ने से भी परेशानी हुई है — समाधि होती है, उसमें कोई विचार नहीं होते, सविकल्प-निर्विकल्प, सहज समाधि — सब किताबों ने भ्रमित कर दिया, पढ़-पढ़ के सब परेशान हो गए; कितनी ध्यान की विधियां बांट दीं।

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वीडियो: जीव , माया और ब्रह्म क्या है ? #livesatsangyogijika #aadhyatmik_satsang #yogijikasatsang · 2025-03-09