प्रश्नोत्तर P23-0133 · भाग 23
गुरु जी, ईमानदारी, सत्कर्म, सत्संग, अध्यात्म और धर्म बार-बार भार जैसे लगते हैं। ऐसा क्यों?
भार जैसे लगते हैं इसलिए कि मानवता को खत्म कर दिए हो अपने अंदर से। धर्म की परिभाषा है — अपने अंदर मानवता को जागृत करना। यह है धर्म की परिभाषा।
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