आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P23-0140 · भाग 23

गुरुदेव, कृपा करके मुझ निकृष्ट जीव पर दया कीजिए, दर्शन दीजिए।

निकृष्ट तो आपका कर्म है ना, निकृष्ट आप थोड़ी ना हो। निकृष्ट आपका कर्म है, तो आप वो कर्म छोड़ दीजिए। बात खत्म — आप जैसे थे वैसे हो जाओगे। मुक्ति के लिए काम करो, मुक्त हो जाओगे। यही तो मैं कहना चाहता हूं। निकृष्ट आपका कर्म है, आपकी आत्मा नहीं। आपकी आत्मा को आप कर्म सुधार कर मुक्त करवा सकते हो।

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