प्रश्नोत्तर P23-0143 · भाग 23
गुरु जी, साधक क्यों बार-बार फिसलकर माया-नरक में गिर जाता है?
इसलिए कि जब इस मार्ग में चलते हो, तो जब तक उपलब्धि नहीं होगी तब तक आपको कुछ नहीं आएगा — ना मान मिलेगा, ना सम्मान मिलेगा। तो आपको लगता है मैं तो कुछ कर ही नहीं रहा हूं। ना आपको वाहवाही मिलेगी, ना शाबाशी मिलेगी। ठीक है? तो लगता है कि यार, इतना करने के बाद भी कोई कुछ नहीं कह रहा है, बोल रहा है, तो ऐसा लगता है कि मेरे द्वारा कुछ हो रहा है कि नहीं हो रहा है — भ्रमित हो जाता है। और भौतिक जगत में जैसे ही करते हो, उसका परिणाम आता है; यहां तो परिणाम एक ही बार आएगा। ठीक है? तो इसलिए ज्यादातर लोग भाग जाते हैं, क्योंकि वहां इंद्रियों द्वारा सुख मिलने लगता है। यहां ऐसा कुछ नहीं है। इसलिए ज्यादातर लोग भाग जाते हैं।
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