आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P23-0164 · भाग 23

गुरु जी, आपका सत्संग सुनते हैं। परिस्थिति तब विपरीत हो जाती है जब हम तो सामने वाले के साथ ईमानदारी और सत्कर्म से चलते हैं, पर सामने वाला व्यक्ति न अध्यात्म को समझता है, न हमारी ईमानदारी और सत्कर्म को। ऐसी स्थिति में क्या करें?

कोई बात नहीं — आप समझो, आप निकलो, आप करो, अपना कल्याण करो। आपको अपना करना है। देखो, मैं अपना काम कर रहा हूं; मेरे काम का कोई सदुपयोग कर रहा है, कोई मेरे काम की बुराई भी करता है, निंदा भी करता है, लेकिन क्या मतलब? मुझे पता होना चाहिए कि मैं क्या कर रहा हूं, और क्या करने से मेरा क्या होगा। ठीक है? तो बस लगे रहो अपने कल्याण में।

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