आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P23-0060 · भाग 23

गुरु जी, वर्तमान में कैसे जिएं?

वर्तमान में जीवन नहीं होता है। वर्तमान में हो सकते हो, जी नहीं सकते। जीवन तो या तो अतीत में होगा या भविष्य में। जैसे ही जिए, अतीत और भविष्य में चले गए। वर्तमान में कैसे होंगे? अगर कर्ता का भाव नहीं होगा, कुछ नहीं चाहिए, तो आप करते हुए भी वर्तमान में हो; कुछ चाहिए तो आप वर्तमान में नहीं हो। अगर आप सोच रहे हैं कि आगे की प्लानिंग है या पीछे की — यह बात कर्ता की है, "मैं कर रहा हूं"। जब आप किसी से बात कर रहे हो, उससे आपको कुछ नहीं चाहिए; किसी भी कार्य को आप कर रहे हो, उस कार्य से आपको कुछ नहीं चाहिए, सामने वाले के लिए कर रहे हो, उससे आपको कोई बेनिफिट नहीं लेना — तब आप कार्य करते हुए भी वर्तमान में हो। इसलिए जितने भी महात्मा पुरुष, संत हैं, वे सत्संग करते हुए, लोगों के लिए कार्य करते हुए वर्तमान में रहते हैं — अपने आप में रहते हैं, आनंद में रहते हैं, बाहर जाते ही नहीं, लिप्त ही नहीं होते। आप लिप्त हो गए तो वर्तमान में नहीं हो, और लिप्त तब होंगे जब आपको चाहिए। आपको कुछ नहीं चाहिए तो आप कर रहे हैं तब भी लिप्त हैं ही नहीं — करके भी आप अपने आप में हैं। इस स्थिति में हमें पहुंचना है।

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वीडियो: हम एकांत को बर्दाश्त क्यों नहीं कर पाते हैं ? #live #pratyakshgyan #yogijikasatsang · 2025-03-07