आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P23-0093 · भाग 23

गुरु जी, समझ में तो आता है — शास्त्र, महापुरुषों की वाणी पढ़ते हैं, सब समझ में आ रहा है — लेकिन अपना बनाया हुआ अस्तित्व मिटा नहीं पा रहे। ऐसा क्यों? और ब्रह्म को मानें या जानें?

रिस्क नहीं ले पा रहे हो। पता है क्यों? पक्का नहीं है कि ब्रह्म है। जिस दिन पक्का हो जाएगा, उस दिन क्या आप उसके बिना रह पाओगे? सोच रहे हो कि अगर यह मैं सब छोड़ दूं और वो ना मिला तो — अभी तो कुछ है। यह रिस्क नहीं ले पा रहे हो, छलांग लगानी है। उससे अलगाव इसलिए हुआ कि आपको मालिकपन बनने का भाव आया; अब मालिकपन बनने का भाव छूटे तब उससे मिलना होगा। रिस्क इसलिए नहीं ले पा रहे कि यह आपकी माया प्रत्यक्ष है, वह प्रत्यक्ष नहीं है; यह भी पता है कि आखिरी में यहां भी कुछ नहीं मिलेगा, लेकिन अभी तो कुछ है। अगर किसी को अपनी मां का पता चल जाए तो वह और कहीं रहेगा? अपनी मां की गोद में कूद जाएगा। यह तभी पक्का होगा जब अस्तित्व को मिटाओगे। और ना मानना है ना जानना है — मानोगे तो भी भटक गए, जानोगे तो भी भटक गए। किसको जानोगे? जब तक जानोगे तब तक आप दो हो — जानने वाला और जिसे जाना जा रहा है। अपने बनाए हुए अस्तित्व को मिटाना है, मालिकपन के भाव को छोड़ना है — सीधी सी बात है। और "मैं" कैसे मिटेगा? मैं कहां से खड़ा हुआ? "तुम" से — सामने वाले से; जब तक सामने वाला है तब तक मैं कैसे मिटेगा? और तुम के पास किसके लिए गए? कुछ चाहिए में — कुछ चाहिए की वजह से तुमको पकड़ा, तुम की वजह से मैं तैयार हुआ। तो जब कुछ चाहिए की इच्छा का त्याग होगा तो तुम गिरेगा, और तुम गिरेगा तो मैं गिरेगा। कुछ नहीं चाहिए में आ जाओ, बात खत्म हो जाएगी। ब्रह्म से आत्मा भी है, ब्रह्म से माया है — आत्मा अगर माया में रहेगी तो ब्रह्म में नहीं, ब्रह्म में रहेगी तो माया में नहीं, यह ध्यान रखना।

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वीडियो: जीव , माया और ब्रह्म क्या है ? #livesatsangyogijika #aadhyatmik_satsang #yogijikasatsang · 2025-03-09