आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P23-0100 · भाग 23

गुरु जी, यह उम्मीद रहती कहां पर है — मेरे मन में या मेरी बुद्धि में?

बुद्धि सिर्फ निमित्त बनती है, बुद्धि कुछ बताती-उताती नहीं। यह भाषा आपको पढ़ना आता है तो बुद्धि द्वारा पढ़ सकते हो, नहीं आता तो नहीं पढ़ पाओगे — बुद्धि द्वारा आपने क्या सीखा है, बात यह है। वही आदमी कभी आपको अच्छा लगता है, वही बुरा, फिर वही अच्छा — बुद्धि तो वही की वही है, क्यों बदल गया? जैसी आपको सामने से समझ मिलती है। मान लीजिए किसी ने भोजन लाकर दिया, बोला आपसे बहुत प्रेम करने वाले ने दिया है — आप रुचि से खाने लगे; कोई दौड़ा-दौड़ा आया, भोजन मत खाओ, यह शत्रु का है — अब वही भोजन घुटन देने लगा; फिर आपकी मां या कोई सबसे प्रिय आई, बोली क्या मजाक कर रहे हो — बस वही भोजन फिर सुकून देने लगा। बुद्धि वही, आंख वही, मुंह वही, भोजन भी वही — फिर स्थिति क्यों बदली? जैसी आपको समझ मिल रही है, वैसा आपका भाव बदल रहा है।

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वीडियो: जीव , माया और ब्रह्म क्या है ? #livesatsangyogijika #aadhyatmik_satsang #yogijikasatsang · 2025-03-09