प्रश्नोत्तर P24-0005 · भाग 24
लेकिन महाराज जी, जिन्होंने वह बात कही, वे भी तो बोले थे, तभी तो सारा लिखा गया — फिर वे किसके लिए बोले?
यही तो बात है भाई — उस स्थिति में जाने के बाद बोलना नहीं पड़ता। आदि गुरु शंकराचार्य ने अद्वैत का प्रचार किया, ठीक है, लेकिन किया तो द्वैत में — दूसरा था तभी तो लोगों को समझाने निकले। जब अभेद था तो किसी को समझाना क्यों; किसी को समझा रहे हो तो फिर द्वैत है। मैं तो कह रहा हूं — एक से अनेक है, अनंत है, अनंत आत्माएं हैं, और इच्छा-अपेक्षा में वे जीवात्माएं हो गईं। हमें बस इच्छा-अपेक्षा से मुक्त कराना है और अपने घर चले जाना है।
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वीडियो: साधना में ध्यान रखने योग्य विशेष ज्ञान / #योगीजी_का_सत्संग #साधना #ध्यान #ज्ञान · 2024-08-01