प्रश्नोत्तर P24-0008 · भाग 24
गुरु जी, फिर कर्म लागू किसके हुए — उस आत्मा के?
जो मेन चीज आत्मा है, उसके थोड़ी लागू होते हैं कर्म; आत्मा पर असर नहीं पड़ता, वह भुगतने थोड़ी आती है। भोग आप यहीं पे रहे हो — इच्छा-अपेक्षा में। मेरा में दुख है, नहीं तो दुख-सुख नहीं है। आपने मेरा मान लिया, तो आत्मा जीवात्मा हो गई, जैसे पानी बर्फ हो गया — जब भी टूटेगा, जब भी कुछ होगा, तो बर्फ को होगा, पानी को कुछ भी नहीं होगा। कोई भी वस्तु लो, जब तक वह आपकी है तभी तक दुख है; जैसे उसे बेच दो, न दुख है न सुख। मेरा का भाव जहां-जहां है वहां सुख-दुख है, और मेरा का निर्माण आपके द्वारा हुआ है। इसलिए धीरे-धीरे मेरा के भाव से अपने आप को छुड़ाओ; बस मान मत लो कि एक ही है, तब कुछ कर नहीं पाओगे।
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वीडियो: साधना में ध्यान रखने योग्य विशेष ज्ञान / #योगीजी_का_सत्संग #साधना #ध्यान #ज्ञान · 2024-08-01