प्रश्नोत्तर P24-0013 · भाग 24
गुरु जी, 20 साल किताबें पढ़ते-पढ़ते और भटकते-भटकते मैंने मान लिया कि मैं स्वयं ब्रह्म हूं; पर मन में यही रहता है कि ऐसा क्या रह गया, क्या छूट रहा है कि जो मैं हूं वह नहीं हो पा रहा?
किताबें पढ़कर बहुत लोग भटक रहे हैं — किसी गुरु के शरण में जाकर अनुसरण करना पड़ेगा। जब उसके साथ जियोगे, जीवंत गुरु होगा, तो आपको जीने का तरीका बताएगा, उस तरीके में समझाएगा जिसमें आप समझ सकते हो — और वह किताबों में नहीं लिखा जाता। किताबों में सीधा लिखा है कि ब्रह्म एक ही है, उसके अलावा कुछ भी नहीं; तो फिर किताबें क्यों, कोई अज्ञानी क्यों, कोई ज्ञानी क्यों, किसी को ऋषि, किसी को महात्मा क्यों बोला जा रहा है? उनके कर्मों के कारण। और कर्म करने के लिए दो चाहिए — यह शरीर और मन उससे अलग हैं; शरीर पंचतत्व से आया, पंचतत्व परमात्मा से — तो दो तो वहीं हो गए।
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वीडियो: साधना में ध्यान रखने योग्य विशेष ज्ञान / #योगीजी_का_सत्संग #साधना #ध्यान #ज्ञान · 2024-08-01