आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P23-0081 · भाग 23

गुरु जी, आदमी तो आदत से भी चलता है — हैबिट हो गई, वह करे जा रहा है। क्या गुरु उसकी आदत को तोड़ सकता है? और जो काम गुरु नौ महीने में कर सकता है, वह नौ दिन में भी तो कर सकता है?

धीरे-धीरे उसके पास रहेगा तो तोड़ देगा — उसके सानिध्य में रहना पड़ेगा, ज्यादा दूर से काम नहीं चलेगा। हल्की बीमारी है तो डॉक्टर दवा-टेबलेट दे देगा; बहुत ज्यादा है तो एडमिट करेगा, चीर-फाड़ करेगा, फिर तो तुम्हें वहां रुकना पड़ेगा। लीवर का ऑपरेशन की बारी आई तो सारी नौकरी वगैरह छोड़ते हो कि नहीं? आप लोग तो ज्यादा बीमार हो — कम से कम नौ महीने तो मां के गर्भ में थे, उतना तो रहो, एडमिट तो हो। इसलिए तो सारी व्यवस्था गुरु देता है — खाना-पीना-रहना, कुछ सोचना नहीं है, क्योंकि उसे पता है अब तू एडमिट हो जा। और नौ दिन में? आप हॉस्पिटल में जाकर बोल दो कि तुरंत कर दे — होता है क्या? विज्ञान इतना आगे चला गया, क्या ऐसी कोई व्यवस्था है कि बच्चे को नौ दिन में पैदा कर दे? नहीं हो सकता।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: अभेद होते हुए भी भेद क्यों लगता है ? #livesatsang #livesatsangyogijika · 2025-03-07