प्रश्नोत्तर P24-0003 · भाग 24
गुरु जी, जब सब में मैं ही हूं, तो हो सकता है वह खुद का खुद ही सुन रहा हो, खुद ही सुना रहा हो?
जरूरत क्या है? जरूरत क्यों पड़ रही है? जरूरत के पीछे कामना है। हम एक-दूसरे से तभी बात करते हैं जब कुछ चाहिए; बिना मतलब के कोई नहीं बोलेगा। बात करने के लिए कोई अलग चाहिए, विपरीत कोई होगा तभी बात होगी; सब एक जैसे हैं तो कौन सुनने वाला रहेगा, कौन सुनाने वाला। अपने आप में जैसे ही आप हो जाओगे, आपके प्रश्न खत्म हो जाएंगे, उत्तर हो जाएंगे — बाहरी रास्ता, यह गांव आगे कहां पड़ेगा, वह पूछ सकते हो, लेकिन आंतरिक यात्रा का किसी से पूछ ही नहीं पाओगे, क्योंकि उसका पता चल ही गया। तो जांचो अपने आप को कि मेरी स्थिति क्या है — किसी की स्थिति का निर्णय कोई और नहीं कर सकता।
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वीडियो: साधना में ध्यान रखने योग्य विशेष ज्ञान / #योगीजी_का_सत्संग #साधना #ध्यान #ज्ञान · 2024-08-01