प्रश्नोत्तर P24-0002 · भाग 24
गुरु जी, इस शब्दों के जाल से आदमी निकलेगा कैसे? और क्या किसी को समझाना भी कामना है?
जैसे बनाए हो, जाल को काट दो। काटते-काटते आखिर में कुछ नहीं बचेगा। जहां पहुंचे हो वहां नहीं पहुंचे — वह आपकी बुद्धि का स्तर पहुंचा होगा; जहां भी कामनाओं से पहुंचे हो, उस जाल को काटना है। किसी को ज्ञान देना भी कामना है। प्रयास करना कि इसे समझना ही है — वह कामना है। अगर आप व्यक्तिगत किसी को समझा रहे हो तो वह कामना हो सकती है; सार्वजनिक समझा रहे हो तो कामना नहीं। लेकिन जैसा आपने बताया कि मैं वही हूं और सब में मैं हूं, तब तो किसी से कुछ बोलने की, किसी को समझाने की जरूरत ही नहीं, क्योंकि सब में मैं हूं तो समझाऊं किसको? तो जो स्थिति बनाई है उससे निकलना है — आपकी स्थिति का निर्णय आप ही को करना है।
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वीडियो: साधना में ध्यान रखने योग्य विशेष ज्ञान / #योगीजी_का_सत्संग #साधना #ध्यान #ज्ञान · 2024-08-01